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Jun 6, 2020
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विषय – साइबर क्राइम से जुडी जानकारी , व् बचने के उपाय –

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विषय – साइबर क्राइम से जुडी जानकारी , व् बचने के उपाय –
नॉट :-
साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जिस में कंप्यूटर और नेटवर्कशामिल है। किसी भी कंप्यूटर का अपराधिक स्थान पर मिलना या कंप्यूटर से कोई अपराध करना कंप्यूटर अपराध कहलाता है। कंप्यूटर अपराध मे नेटवर्क शामिल नही होता है। किसी कि नीजी जानकारी को प्राप्त करना और उसका गलत इस्तमाल करना। किसी की भी निजी जानकारी कंप्यूटर से निकाल लेना या चोरी कर लेना भी साइबर अपराध है।
कंप्यूटर अपराध भी कई प्रकार से किये जाते है जैसे कि जानकारी चोरी करना, जानकारी मिटाना, जानकारी मे फेर बदल करना, किसी कि जानकारी को किसी और देना या कंप्यूटर की भागो को चोरी करना या नष्ट करना। साइबर अपराध भी कई प्रकार के है जसे कि स्पैम ईमेल, हैकिंग, फिशिंग, वायरस को डालना, किसी की जानकारी को ऑनलाइन प्राप्त करना या किसी पर हर वक़्त नजर रखना।

साइबर अपराध के प्रकार

स्पैम ईमेल- अनेक प्रकार के ईमेल आते है जिसमें एसे ईमेल भी होते है जो सिर्फ कंप्यूटर को नुकसान पहुचाते है। उन ईमेल से सरे कंप्यूटर में खराबी आ जाती हैं।

हैकिंग- किसी की भी निजी जानकारी को हैक करना जेसे की उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड और फिर उसमे फेर बदल करना।

साइबरफिशिंग- किसी के पास स्पैम ईमेल भेजना ताकी वो अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से उसका नुकसान हो सके। यह इमेल आकार्षित होते है।

वायरस फैलाना -साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर आपके कम्प्युटर पर भेजते हैं जिसमें वायरस छिपे हो सकते हैं, इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स आदि वायरस शामिल हैं, यह आपके कंप्‍यूटर को काफी हानि पहुॅचा सकते हैं।

सॉफ्टवेयर पाइरेसी – सॉफ्टवेयर की नकल तैयार कर सस्‍ते दामों में बेचना भी साइबर क्राइम के अन्‍तर्गत आता है, इससे साफ्टवेयर कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है साथ ही साथ आपके कीमती उपकरण भी ठीक से काम नहीं करते हैं।

फर्जी बैंक कॉल- आपको जाली ईमेल, मैसेज या फोन कॉल प्राप्‍त हो जो आपकी बैंक जैसा लगे जिसमें आपसे पूछा जाये कि आपके एटीएम नंबर और पासवर्ड की आवश्यकता है और यदि आपके द्वारा यह जानकारी नहीं दी गयी तो आपको खाता बन्‍द कर दिया जायेगा या इस लिंक पर सूचना दें। याद रखें किसी भी बैंक द्वारा ऐसी जानकारी कभी भी इस तरह से नहीं मॉगी जाती है और भूलकर भी अपनी किसी भी इस प्रकार की जानकारी को इन्‍टरनेट या फोनकॉल या मैसेज के माध्‍यम से नहीं बताये।

सोशल नेटवर्किग साइटों पर अफवाह फैलाना – बहुत से लोग सोशल नेटवर्किग साइटों पर सामाजिक, वैचारिक, धार्मिक और राजनैतिक अफवाह फैलाने का काम करते हैं, लेकिन यूजर्स उनके इरादें समझ नहीं पाते हैं और जाने-अनजाने में ऐसे लिंक्‍स को शेयर करते रहते हैं, लेकिन यह भी साइबर अपराध और साइबर-आतंकवाद की श्रेणी में आता है।

साइबर बुलिंग – फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग पर अशोभनीय कमेंट करना, इंटरनेट पर धमकियॉ देना किसी का इस स्‍तर तक मजाक बनाना कि तंग हो जाये, इंटरनेट पर दूसरों के सामने शर्मिंदा करना, इसे साइबर बुलिंग कहते हैं। अक्‍सर बच्‍चे इसका शिकार हाेते हैं। इससे इनके सेहत पर भी असर पडता है

कैसे बचे :-
1 साइबर क्राइम ,और ऐसे क्राइम करने वालो से बचने के लिए सबसे जरूरी होती है आपकी अपनी जागरूकता , इसे हमेशा बना के रखे

2 कभी भी अपने बैंक , फ़ोन और कंप्यूटर से जुडी जानकारी किसी के साथ भी साझा ना करे

3 ऑनलाइन सस्ती सामान के खरीदारी करने से बचे , ज्यादातर ये स्किम और सस्ती चीजों के लालच देकर साइबर अपराधी अपना काम करते है

4 अपने बैंक के ओटीपी कभी भी किसी को ना दे

5 ऑनलाइन आपके सगे सम्भन्धी व् मित्र बनकर पैसे मांगने वालो की पूर्णता जाँच करे ,

भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) में साइबर अपराधों से संबंधित प्रावधानसंपादित करें :-

ईमेल के माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजना-आईपीसी की धारा 503

ईमेल के माध्यम से ऐसे संदेश भेजना, जिससे मानहानि होती हो-आईपीसी की धारा 499

फर्ज़ी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉड्‌र्स का इस्तेमाल-आईपीसी की धारा 463

फर्ज़ी वेबसाइट्‌स या साइबर फ्रॉड-आईपीसी की धारा 420

चोरी-छुपे किसी के ईमेल पर नज़र रखना-आईपीसी की धारा 463

वेब जैकिंग-आईपीसी की धारा 383

ईमेल का गलत इस्तेमाल-आईपीसी की धारा 500

दवाओं को ऑनलाइन बेचना-एनडीपीएस एक्ट

हथियारों की ऑनलाइन ख़रीद-बिक्री-आर्म्स एक्ट

हैप्पीनेस इंडिया न्यूज़
साइबर क्राइम ( cybercrime)

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