Aug 14, 2021
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स्वतंत्रता दिवस पृष्ठ्भूमि से आज अमृत महोत्सव तक

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स्वतंत्रता दिवस भारत में प्रत्येक वर्ष भारत में 15 अगस्त को बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी दिन भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्ति मिली और एक नए भारत का नवनिर्माण प्रारम्भ हुआ। 15 अगस्त 1947,ये वही दिन था जब स्वतंत्र भारत को अंतराष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान मिली और औपनिवेशिक भारत एक स्वतंत्र भारत के रूप में उभर कर सामने आया।

हलाकि अगर प्राचीन काल से आधुनिक काल तक की चर्चा करे तो भारत अपनी समृद्ध संस्कृति,विविध सामाजिक परिवेश,संपन्न अर्थव्यवस्था के लिए विश्वविख्यात था लेकिन भारत की इस ख्याति को 200 साल के ब्रिटिश औपनिवेशिक परिवेश ने धूमिल कर दिया था। पुनः 15 अगस्त 1947 वह दिन था जब भारत अपनी अनमोल विरासत के साथ वैश्विक मंच पर उपस्थित हुआ।
आजादी का यह सफर इतना आसान नहीं था जितना की हमारा इस पर दो चार लाइन लिखना या बोलना। यह सफर तय करने में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को लगभग 200 वर्ष लगे। इस संघर्ष के दौरान हमारे कई वीर सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति  दी। इसमें सुभाष चंद्र बोष,लाला लाजपत राय,बल गंगाधर तिलक ,भगत सिंह,महात्मा गाँधी आदि जैसे सेनानियों की महती भूमिका रही।

भले ही देश आजाद हो गया था लेकिन अभी यह आजादी अधूरी थी। जिसे पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हमारे लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल ने। आजादी के बाद भी देश विभिन्न रियासतों में बटा हुआ था तथा ये रियासत अपनी स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे। इस परिस्थिति में लोहपुरुष ने सभी रियासतों को साथ भारत के साथ एक सूत्र में बांधने का काम किया

सीधे -साधे शब्दों में बात करें तो यह आजादी हमें ब्रिटिश हुकूमत से मिली थी मतलब ब्रिटिश शासन से हम आजाद हुए थे। लेकिन विस्तृत और सम्पूर्ण परिपेक्ष्य में चर्चा करें तो यह आजादी राष्ट्रवाद की एक नई झलक के साथ प्रस्तुत हुआ था । जहाँ भारत को नई पहचान मिली थी ,जहाँ हम सम्प्रभुता से रूबरू हुए, न सिर्फ राजनितिक तौर पे बल्कि हम आर्थिक,सामाजिक ,सांस्कृतिक रूप से भी स्वतंत्र हुए।

हलाकि आज़ादी का यह मंजर केवल खुशनुमा ही नहीं था। जहाँ एक तरफ देश आज़ादी के बाद के लिए नए सपने संजो रहा था वहीं कई सारी चुनौतियां भी मौजूद थी।भारतीय अर्थव्यवस्था उपनिवेश का दंश झेलते झेलते जर्जर हो चुकी थी ,सामाजिक और जातीय तौर पर अंग्रेजो की नीतियों के कारण विभिन्न मतभेद उपस्थित थे और यह मतभेद विभिन्न दंगो और विभाजन के वीभत्स स्वरुप के साथ प्रकट हुआ |

दूसरी ओर राजकीय कोष बिल्कुल नाम मात्र का था ,आधारभूत संरचनाओं की भरी कमी थी ,देश में एक समन्वित राष्ट्रीय निति और एक संतुलित विदेश की भी दरकार थी।

लेकिन धीरे धीरे एक मजबूत इच्छाशक्ति व् विस्तृत रणनीति के तहत हमारे राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ताओ ने भारत को एक नया आकार प्रदान किया है। आजादी के 75वी वर्षगांठ पर हम यह गर्व से कह सकते है की आज हमारा देश न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर काफी मजबूत है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हमारी एक अपनी पहचान है।

वस्तुतः आजादी के बाद हमने एक लम्बा सफर तय कर लिया है हम चांद तक पहुंच चुके है ,हमारी अर्थव्यवस्था की गिनती अब बड़ी अर्थव्यस्थाओ में की जाती है। विज्ञान तकनीक और अर्थव्यवस्था के अलावे हमने एक सफल लोकतंत्र का प्रतिमान गढ़ा है। न सिर्फ एक उन्नत संविधान बल्कि एक सुदृढ़ न्यायिक प्रणाली की पहचान बनाई है।

यद्यपि इन तमाम चीजों के बरक्स माननीय प्रधानमंत्री द्वारा घोषित अमृत महोत्सव बिलकुल सही प्रतीत होता है तथापि इनके साथ साथ हमारा ध्यान देश के कुछ स्याह पहलुओं की तरफ खींच ही जाता है। आज़ादी के दौरान जिस निष्पछ और निष्कलंक राजनीति की शुरुआत हुई थी ,वह अब दुर्लभ हो चुकी है।महिलाओ और पिछड़े वर्गों के स्तिथि में सुधार का जो बीड़ा राजा राम मोहन रॉय और महात्मा गाँधी ने उठाया था ,वह आज भी अधूरा है।

भ्रष्टाचार ,शिक्षा की पिछड़ी हालत,बढ़ती बेरोजगारी ,गरीबी का दुष्चक्र,साम्प्रयवाद का फैलता जहर,रोज होती बलात्कार जैसी कुत्सित घटनाएं,बाल श्रम और बालकों का व्यापार,स्वास्थ्य का खस्ता हाल ,किसानो की आत्महत्या जैसे कई पहलु मुँह बाये खड़े है जो इस अमृत महोत्सव पर प्रश्नचिन्ह लगाते है।
इसीलिए भले ही  हम एक लम्बा सफर तय कर चुके लेकिन हमे अभी मीलो और चलना है एक दूसरे से हाथ से हाथ मिलाकर,एक दूसरे के साथ साथ चलकर।

अंततः आज आजादी के स्वर्णिम 75 वर्ष पुरे हो चुके है। यह समय है एक दूसरे को स्वतंत्रता की बधाई देने का ,हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का ,हमारे देश की एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण रखने का प्रण लेने का ,राष्ट्र और राष्ट्रवाद की भावना को दुरुस्त करने का। आजादी के अमृत महोत्स्व की वास्तविकता तभी सुदृढ़ हो पायेगी जब हम तमाम देशवासी अपने राष्ट्र और राष्ट्र के नागरिको के उन्नति के लिए प्रयास करेंगे।
जय हिन्द ,जय भारत

ज्वाला सिंह

 

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