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Nov 29, 2022
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चुरू जिले में स्थित हनुमान जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है जो सालासर बालाजी के नाम से जाने जाते हैं

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सालासर बालाजी

सालासर बालाजी की मंदिर राजस्थान के चुरू जिले में स्थित हनुमान जी का एक प्रसिद्ध मंदिर है जो सालासर बालाजी के नाम से जाने जाते हैं, सालासर में स्थित हनुमान जी को लोग बड़े बालाजी के नाम से भी पुकारते हैं, प्रत्येक वर्ष अश्विन पूर्णिमा एवं चैत्र पूर्णिमा के पावन समय पर यहां विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, बालाजी भगवान हनुमान का ही एक रूप हैं. हनुमानजी और बालाजी के कई मंदिर देश और दुनिया में हैं. फिर भी इस मंदिरों में बालाजी के दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.

मंदिर का इतिहास

भारत में यह एकमात्र बालाजी का मंदिर है जिसमे बालाजी के दाढ़ी और मूँछ है. बाकि चेहरे पर राम भक्ति में राम आयु बढ़ाने का सिंदूर चढ़ा हुआ है. हनुमान सेवा समिति, मंदिर और मेलों के प्रबन्धन का काम करती है, यहाँ रहने के लिए कई धर्मशालाएँ और खाने-पीने के लिए कई जलपान-गृह हैं.
जब सालासर बालाजी मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित की गई थी. सालासर बालाजी मंदिर का इतिहास में हनुमान भगवान बड़े ही चमत्कारिक ढंग से यहां प्रकट हुए थे. इसके पीछे की कथा भी बड़ी रोचक है. घटना 1754 की है जब नागपुर जिले में असोटा गांव में एक जाट किसान अपना खेत जोत रहा था.

तभी उसका हल किसी नुकीली पथरीली चीज से टकराया, उसने खोदा तो देखा कि यहां एक पत्थर था. उसने पत्थर को अपने गमछे से साफ किया तो देखा कि पत्थर पर बालाजी भगवान की छवि बनी है, उसी समय जाट की पत्नी खाना लेकर आई, तो उसने भी मूर्ति को अपनी साड़ी से साफ किया और दोनों दंपत्ति ने पत्थर को साक्षात नमन किया। तब किसान ने बाजरे के चूरमे का पहला भोग बालाजी को लगाया, सालासर बालाजी मंदिर का इतिहास से लेकर अब तक सालासर बालाजी मंदिर में बाजरे के चूरमे का ही भोग लगाया जाता है.

मंदिर timing

सालासर बालाजी मंदिर भक्तों के लिए सुबह 4 बजे खोल दिया जाता है, यहां मंगल आरती सुबह 5 बजे पुजारियों द्वारा की जाती है, सुबह 10:3 बजे राजभोग आरती होती है, बता दें कि ये आरती केवल मंगलवार के दिन होती है.

 

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